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कोरोना की महामारी के बीच लावारिस हिंदु मृतदेहों का मुस्लिम करते है अंतिम संस्कार

भावनगर : कोरोना की महामारी को लेकर अपने भी अपनो से दूर हो रहे है। कोरोना से हुई मौत में कई ऐसे किस्से सामने आते है, जिसमें परिजन भी मृतक का अंतिम संस्कार करने नहीं आ रहे है। ऐसे कठिन समय में भी कुछ मुस्लिम लोग अपनी जान की परवाह किए बिना ही लावारिस हिंदु मृतदेहों का अंतिम संस्कार कर रहे है। इतना ही नहीं अंतिम संस्कार हिंदु रिवाजों के साथ किया जाता है।

देशमें कोरोना मरकज में गए मुस्लिमों की वजह से फैला होने की बातें चल रही है। इसी बीच शहर में कोरोना से मरनेवालों के मृतदेह ज्यादातर लावारिस होने की जानकारी आरिफभाई कालवा को मिली थी। और उन्होंने महबूबभाई शेख, अशरफभाई, मुन्नाभाई घांची, शोएबभाई समेत इम्तियाजभाई मिर्जा समेत के दोस्तो से मिलकर ऐसे ही मृतदेहों का अंतिम संस्कार करने का निर्णय लिया। तब से जब भी किसी किसीके कोरोना से मरने की सूचना मिलती है, यह टीम पीपीई किट में सज्ज होकर श्मशान पहुंच जाती है।

13 जनवरी को एक 35 साल के युवक की कोरोना से मौत हो गई। उसका अंतिम संस्कार करने सिर्फ उसके वृद्ध पिता आए। वह बेटे के शव को देख फूटफूटकर रो रहे थे, तभी आरिफभाई और उसकी टीम वहां पर पहुंच गई। वृद्ध पिता को सांत्वना देने के साथ उन्होंने अपने किसी संबंधी की तरह हिंदु विधि के अनुसार युवक का अंतिम संस्कार किया था।

नियमों के अनुसार क्वोरंटाईन होने के कारण मृतक के परिजन अंतिम संस्कार के लिए नहीं आ सकते। ऐसे में आरिफभाई की टीम को खबर मिलते ही पूरी टीम के लोग बिना किसी डर के पीपीई किट पहन अस्पताल पहुंच जाते है। और मृतक हिंदु होता है तो श्मशान व मुस्लिम है तो कब्रिस्तान पहुंचाकर उसका अंतिम संस्कार किया जाता है। आज भी ऐसी ही एक महिला सविताबेन डोडिया की मौत होने पे इस टीम ने उसका परिवार बनकर अंतिम संस्कार किए है।

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