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कोरोना को मात देकर डॉक्टर परिवार ने कहा-सावधानी ही सबसे बड़ी सुरक्षा

सूरत. कोरोना दिनों-दिन लोगों को अपना शिकार बना रहा है. लोग इस दिशा में अभी भी सचेत नहीं हुए हैं, इसलिए यह रोग लगातार बढ़ रहा है। इस बीमारी से अब कोरोना वारियर्स भी चपेट में आ रहे हैं। यहां वराछा हीराबाग के पास रहने वाले एक डॉक्टर परिवार संक्रमित हुआ। उसके बाद सभी ने कोरोना को मात दे दी। अब सभी स्वस्थ हैं।

सबसे पहले पिता हुए पॉजीटिव

विट्ठल नगर सोसायटी में रहने वाले आर्थोपेडिक डॉक्टर और उसका परिवार कोरोनाग्रस्त हुआ। सबसे पहले पिता संक्रमित हुए। उसके बाद उनकी सेवा करने वाले डॉक्टर बेटे और उनकी पत्नी को कोरोना हुआ। अच्छा इलाज और सावधानी की बदौलत वे सभी स्वस्थ हो गए। स्वस्थ होने के बाद वे लोगों से यही कहते हैं कि सावधानी ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।

पिता बीमार हुए, तो हमने किसी को खबर नहीं की

डॉ. किशारे भाई दूधात ने बताया कि लॉकडाउन की घोषणा के बाद हम सभी बहुत ही सावधानी से रहते थे। शुरुआती दिनों में बेकरी से सामान, फ्रूट, सब्जी आदि के लिए निकलते थे, बाद में सब बंद कर दिया। इस दौरान पिता की तबीयत कुछ बिगड़ी। उनका घर पर ही इलाज शुरू कर दिया। इसकी सूचना हमने बाहर न देना ही उचित समझा।

पिता को डायबिटीस है

कोरोना की जर्नी के विषय में डॉ. दूधात ने बताया कि पापा डायबिटीस और ब्लडप्रेशर के मरीज हैं। उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कम है। शुरुआती दिनों में वे बाहर निकले थे, तभी वे संक्रमित हो गए थे। घर में जब कोई बीमार पड़ता है, तो हम सावधानी नहीं बरतते। पिता जी के बीमार होने पर हमने उनका तीन दिनों तक घर पर ही उपचार किया। पर जब उन्हें फेफड़े की तकलीफ हुई, तब हमने उनका कोरोना टेस्ट कराया।

मां को आइसोलेट किया गया, वे संक्रमित नहीं हुई

डॉ. दूधात ने बताया कि जरूरी प्रिकाशन लेने की भूल के कारण मैं संक्रमित हो गया। तीन दिनों बाद मुझे बुखार आया। रिपोर्ट पॉजीटिव आई। उसके बाद डेंस्टिस्ट पत्नी भी संक्रमित हो गई। माता को आइसोलेट किए जाने से उनकी तबीयत ठीक रही। उन्हें किसी तरह का संक्रमण नहीं था। एक घर के हम तीन लोगों को कोरोना था। सभी सिविल हॉस्पिटल में भर्ती हुए। वहां हमारी खूब सेवा की गई। दस दिनों बाद हम सबकी रिपोर्ट निगेटिव आई।

सावधानी बरतना ही हमारी सुरक्षा

डॉ. दूधात ने बताया कि सरकार ने जो प्रिकाशन के लिए कहा है, हमें उसका पालन करना चाहिए। हाथ में मोजा, मुंह पर मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना बहुत ही जरूरी है। हमें सीमा पर लड़ने नहीं जाना है, पर हम यदि मेडिकल टीम का ही हौसला अफजाई करें, यही हमारी सबसे बड़ी देश सेवा होगी।

सिविल हॉस्पिटल में अच्छा इलाज

सिविल अस्पताल में डॉक्टर्स बेहतर इलाज कर रहे हैं। आयुर्वेद और होम्योपैथिी के डॉक्टर भी दवाएं दे रहे हैं, उन दवाओं से प्रतिरोधक क्षमता विकसित होती है। इसी शक्ति से हमने कोरोना को मात दी है। इसके अलावा सावधानी भी एक सुरक्षा ही है। समय पर दवाएं लेना, किसी भी तरह की तकलीफ हो, तो उसे तुरंत डॉक्टर को बताना चाहिए। इसे छिपाना नहीं चाहिए। छिपाने से रोग ठीक नहीं होता, बल्कि बढ़ता ही है। यदि प्राथमिक लक्षणों के दिखते ही इलाज शुरू कर दिया जाए, तो कोरोना ठीक हो सकता है।

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