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एक साल से कम उम्र में गंवाया था पिता का साया, मां की परवरिशमें बिना ट्यूशन बेटीने 10वी में किया टॉप

 

राजकोट : आज गुजरात माध्यमिक बोर्ड द्वारा 10वी कक्षा के रिजल्ट घोषित किए गए। जिसमें एक साल से कम उम्र में पिता का साया गंवानेवाली और सिर्फ मां की छत्रछाया में पली बेटीने बिना ट्यूशन 99.99 PR के साथ टॉप किया है। ओझा परिवार की मानसी द्वारा हांसिल की गई इस सफलता को लेकर मां गीताबेन की आंखे खुशी से छलक उठी थी। लोग भी मानसी की इस कामयाबी को दिल से सलाम कर रहे है।

मानसी की मां ने बताया कि, जब बेटी सात महीनों की थी, तभी उसके पिता का देहांत हो गया था। और सारी जिम्मेदारी मेरे कंधों पर आ पड़ी थी। हालांकि मैंने तो अपने बच्चों को उच्च शिक्षा देने का संकल्प कर लिया था। कुछ ही समय बाद मैंने नगर प्राथमिक शाला नं- 17 में नौकरी शुरु कर दी। घर की आर्थिक स्थिति को समझते हुए मानसी ने भी 10वी में ट्यूशन रखने से इन्कार कर दिया। आज मानसी को जो सफलता मिली है, इससे मैं बहुत खुश हूं।

इधर मानसी ने बताया कि, में धोलकिया स्कूल में थी। और हररोज 8 घंटे से ज्यादा पढ़ाई करती थी। साथ ही होमवर्क और पुराने पेपर को सॉल्व करना मेरी आदत बन गई थी। जहां भी मुजे समजने में प्रॉब्लम होता था, वहां मेरी स्कूल के टीचर्स मेरी मदद कर देते थे। इसी कारण मुजे कभी ट्यूशन लेने की जरूरत ही महसूस नहीं हुई थी। आगे चलकर में डोक्टर बनना चाहती हूं। अन्य विद्यार्थियों को भी संदेश देते हुए उसने कहा कि, अगर संकल्प दृढ़ हों, तो सारी बाधाएं दूर हो जाती हैं।

कामयाबी हासिल करना बड़ी बात नहीं है, बड़ी बात उसके पीछे के संघर्ष की है। इस उपलब्धि के पीछे मानसी और उसकी मां का संघर्ष जानकर लोगों की आंखें गीली हो सकती हैं। मानसी केवल 7 महीने की थी, तब उसके पिता का देहावसान हो गया। इस पर सारी जवाबदारी उसकी मां पर आन पड़ी। मां ने भी हिम्मत न हारते हुए अपनी संतानों को उच्च शिक्षा देने का संकल्प किया। मां ने पिता की भी जवाबदारी निभाते हुए बेटी को पढ़ाया। बेटी ने भी मां की भावनाओं को समझते हुए बिना ट्यूशन के यह उपलब्धि हासिल की। इस तरह से उसने

रोज 8 से 9 घंटे अध्ययन
मानसी रोज 8 से 9 घंटे पढ़ाई करती थी। उसने ढोलकिया स्कूल में दसवीं की पढ़ाई की। रोज होम वर्क करना उसकी आदत में शामिल था, जो परीक्षा में काम आया। गीली आंखों से मानसी की मां गीताबेन ने बताया कि मानसी के इस रिजल्ट के पीछे उसकी स्कूल का भी बहुत बड़ा योगदान है। स्कूल की तरफ से उसे काफी मदद मिली। मानसी का सपना है कि वह डॉक्टर बने।

परीक्षा के समय ही टूटा हाथ, पाए 97.21 पीआर
शहर के उत्सव मेहता का हाथ परीक्षा के कुछ दिन पहले ही टूट गया। हाथ में प्लेट लगाई गई। वह परीक्षा देने की स्थिति में नहीं थे। पर ड्राप लेने के बजाए उसने परीक्षा देने का निश्चय किया। इसके बाद परीक्षा में उसने राइटर भी नहीं रखा। इसके बाद भी 97.21 पीआर प्राप्त कर उसने अपने परिवार का गौरव बढ़ाया है। उसकी पढ़ाई इनोवेटिव स्कूल में की। उत्सव आगे जाकर साइंस की पढ़ाई करना चाहते हैं।

खुशी व्यास ने प्राप्त किए 94 पीआर, अब यूएस जाएगी
94 पीआर प्राप्त करने वाली खुशी व्यास ने बताया कि मुझे स्कूल से स्कॉलरशिप मिलती है, अब मैं आगे की पढ़ाई के लिए यूएस जाऊंगी। आज जो कुछ भी मैंने हासिल किया है, उसमें मेरे माता-पिता का योगदान है। परिणाम मेरे हिसाब से कुछ कम आया है। इसके पीछे स्कूल के टीचर्स का भी बहुत बड़ा योगदान है, जिन्होंने एक्स्ट्रा क्लासेस कर खूब मेहनत की। मेरे पिता निजी कंपनी में काम करते हैं। कामर्स विषय लेकर मैं आगे की पढ़ाई करना चाहती हूं।

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