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देश में वैज्ञानिकों के 30 ग्रुप कर रहे 4 तरह की वैक्सीन पर रिसर्च, लगेगा इतना समय

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय (Ministry of Science and Technology) की तरफ से आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्र सरकार के प्रिंसिपल साइंटिफिक एडवाइजर विजय राघवन ने बताया कि देश में जल्द से जल्द कोरोना वायरस (coronavirus) के वैक्सीन को खोजने की कोशिश की जा रही है. इसके लिए 30 ग्रुप रिसर्च की दिशा में लगे हुए हैं. राघवन ने कहा एक टीके की खोज में ना सिर्फ लंबा वक्त लगता है बल्कि पैसा भी ऐसे खर्च होता है. उम्मीद है कि सालभर के भीतर कोरोना वायरसकी वैक्सीन खोज ली जाएगी. इस पर 2 से 3 बिलियन डॉलर का खर्चा आ सकता है.

राघवन के मुताबिक कोरोना पर 4 कैटेगरी की वैक्सीन हो सकती है और सब लोग इसको बनाने की कोशिश में लगे हुए हैं. वैक्सीन बनने के बाद भी लोगों तक पहुंचाने के लिए ज्यादा लॉजिस्टिक की जरूरत होगी. चर्चा हो रही है कि किस वर्ग को पहले वैक्सीन दिया जाएगा.

जब कोविड-19 वैक्सीन बनकर तैयार हो जाएगी, तब यह कहा नहीं जा सकता कि यह पहले दिन से सभी के लिए उपलब्ध हो जाएगी. इसके लिए लॉजिस्टिक पर ध्यान देना होगा. किस वर्ग को पहले देना है, इस पर चर्चा चल रही है. अभी कहा नहीं जा सकता कि वैक्सीन की खुराक कितनी होगी. ड्रग्स की भूमिका केमिकल के जरिये शरीर मे मौजूद वायरस पर प्रहार करना है. वैक्सीन teडेवलपमेंट का काम चरणबद्ध तरीके से करना होता है. अभी तक इंसानों पर ट्रायल के स्तर तक वैक्सीन डेवलपमेंट का काम भारत की कोशिश में नहीं पहुंचा है.

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