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देशमें पहलीबार गुजरात में कोरोना से मरनेवालों की होगी अटॉप्सी, रिसर्च समिति ने डॉक्टर्स को भेजी लिस्ट

गांधीनगर : देशमें पहलीबार गुजरात राज्य में कोरोना से मरनेवालों की अटॉप्सी करने का निर्णय लिया गया है। डिप्टी सीएम नितिन पटेल की अगुवाई में राज्य की रिसर्च समिति ने वरिष्ठ डॉक्टरों को प्रोटोकॉल, मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) और एहतियाती उपायों के साथ जरूरती सुविधाओं की एक लिस्ट भेजी है। इस गाइडलाइन में कोरोना वायरस से मरनेवालों की अटॉप्सी करने को कहा गया है ताकि उसके बेस पर रिसर्च हो सके।

मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ डॉक्टरों को गाइडलाइन भेजी गई

अहमदाबाद स्थित बी जे मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ डॉक्टरों को गाइडलाइन मिली है। कॉलेज में पैथॉलजी की एचओडी डॉ. हंसा गोस्वामी ने बताया कि, हमें भी एसओपी तैयार करने और कोरोना के मरीजों की अटॉप्सी करने के लिए तैयार होने के लिए कहा गया है। ऐसेमें गुजरात जल्द ही भारत का पहला ऐसा राज्य हो सकता है जहां कोविड-19 से मौत पर पैथॉलजी और रोग प्रगति में रिसर्च की सुविधा दी जा सकती है।

पर्याप्त पीपीई किट समेत चाहिए यह सुविधा

राजकोट सरकारी अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट मनीष महेता का कहना है कि, जब कोरोना वायरस से किसी की मौत होती है, तो उसके शरीर में क्या चेन्ज हुआ यह जानने के लिए एटोप्सी करना जरूरी होता है। लेकिन इसके लिए पर्याप्त पीपीई किट के साथ ही ऐसी या एकजोस फेनवाला कमरा जरूरी है। अगर ऐसा नहीं होने पर एटोप्सी करनेवाले डॉक्टर्स के संक्रमित होने का खतरा रहता है।

 

जानिए क्या है क्लिनिकल-पैथलॉजिकल अटॉप्सी ?

मेडिकल कॉलेजों के फरेंसिक विभाग मेडिको लीगल मामलों में पुलिस की मदद के लिए शव का पोस्टमॉर्टम करते हैं। किसी भी बीमारी की मरे व्यक्ति की अटॉप्सी करके पैथॉलजिस्ट उसका अध्ययन करते हैं तो उसे पैथलॉजिस्ट या क्लिनिकल अटॉप्सी कहा जाता है। हालांकि कोरोना महामारी के दौरान शव परीक्षण करने के लिए राज्य में पर्याप्त स्टाफ न होना चिंता का विषय है।

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