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इकलौते बेटे को खोकर मानसिक तनाव में जी रही थी मां, अब 50 साल की उम्र में ऐसे दिया बच्चे को जन्म

सूरत : आधुनिक समय में विज्ञान काफी आगे बढ़ चुका है। और इसी कारण एक समय में असंभव लगने वाली बातें आज हकीकत बनकर सामने आने लगी है। ऐसी ही एक घटना में शहर के अडाजल क्षेत्र में सामने आई है। जिसमें मां के इकलौते बेटे ने 21 साल की उम्र में स्यूसाइड कर लिया था। इसी कारण वह मानसिक तनाव में जीने लगी थी। हालांकि 50 साल की उम्र में उसने आईवीएफ टेक्नालॉजी की मदद से एक बच्चे को जन्म दिया है।

संवाददाता के अनुसार, अडाजल निवासी भागीरथी बेन का इकलौता बेटा अभिजित सिंह आईआईटी यूनिवर्सिटी में कंप्यूटर इंजीनियरिंग के तीसरे वर्ष की पढ़ाई कर रहा था। लेकिन 18 मार्च-2018 को किसी वजह से 21 वर्षीय अभिजितसिंहने खुदकुशी कर ली। इसके बाद से भागीरथी बेन मानसिक तनाव में रहने लगी। लेकिन इसी दौरान उन्हें आईवीएक टेक्नोलॉजी के बारेमें पता लगा। और उन्होंने डॉ. पुजा नाडकर्णी का संपर्क किया। अब इस टेक्नोलॉजी के झरिये वह फिर एकबार मां बनी है।

इस बारेमें गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. पूजा नाडकर्णी ने कहा कि, नि:संतान दम्पति को कृत्रिम रूप से संतान देने की पद्धति को आईवीएफ कहा जाता है। इस उम्र में मां बनने की भागीरथीबेन की हिंमत देखकर मैंने भी यह बीड़ा उठाया। और पति-पत्नी के क्रोमोजोम्स को मां के गर्भाशय में स्थापित कर दिया। कुछ सप्ताह बाद उनके गर्भवती होने का पता चला। और 9 महीनों बाद उन्होंने संतान को जन्म दिया। जिसके कारण वह तो मानसिक तनाव से बाहर आ गई। साथ-साथ उनके परिवार में भी खुशी की किलकारियां गूंजने लगी है।

भागीरथी बेन ने बताया कि, 50 साल की उम्र में मां बनना सामान्य नहीं था। लेकिन भला हो विज्ञान का, जिसकी मदद से आज मेरी गोद में अभिजित ने एक बार फिर अपने होने का अहसास दिलाया है। उसकी खुदकुशी के बाद हम तनाव में रहे, अब अभिजित वापस आकर इस तनाव को दूर कर दिया। में और मेरा परिवार डॉ. पुजा नाडकर्णी के आभारी है, जिसने हमें यह सौभाग्य दिलाया है।

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