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कोरोना के इलाज में आयुर्वेदिक दवा के परीक्षण की अनुमति, कई राज्यों में होगा क्लीनिकल ट्रायल

कोरोना वायरस संक्रमितों के इलाज के लिए आयुर्वेदिक दवा के क्लीनिक ट्रायल को मंजूरी मिल गई है। क्लीनिक ट्रायल रजिस्ट्री ऑफ इंडिया (सीटीआरआइ) ने यह अनुमति केरल के पंकजाकस्तूरी हर्बल रिसर्च फाउंडेशन के उत्पाद के लिए दी है।
श्वसन तंत्र में संक्रमण, वायरस जनित बुखार और खांसी-जुकाम के मरीजों को जिंगीवीर-एच टेबलेट से काफी आराम मिलता है। वह श्वसन तंत्र को नुकसान पहुंचाने वाले वायरस और इन्फ्लूएंजा वायरस का प्रभाव रोकने में कारगर पाई गई है। राजीव गांधी सेंटर फॉर बायो टेक्नोलॉजी के वैज्ञानिकों ने पाया है कि यह दवा मानव कोशिकाओं को नुकसान नहीं पहुंचने देती।इस दवा का कोई दुष्प्रभाव भी नहीं है। कोरोना वायरस शरीर के भीतर पहुंचते ही मानव कोशिकाओं पर हमला करता है और कुछ ही घंटों में उन्हें तेज गति से संक्रमित करता चला जाता है जिससे श्वसन तंत्र अवरुद्ध हो जाता है और मनुष्य की मौत हो जाती है।

पंकजाकस्तूरी हर्बल रिसर्च फाउंडेशन के संस्थापक डॉ. जे हरिंद्रन नायर ने बताया कि तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र, तेलंगाना और दिल्ली के कई मेडिकल कॉलेजों से इस दवा के इस्तेमाल के अनुरोध को स्वीकार किया है। अब जबकि सीटीआरआइ ने क्लीनिकल ट्रायल की अनुमति दे दी है, तब दवा का मरीजों पर परीक्षण शुरू हो सकेगा।


डॉ. नायर ने बताया कि जिंगीवीर-एच टेबलेट सात जड़ी-बूटियों से मिलकर बनी है। कोरोना वायरस संक्रमण से मिलते-जुलते लक्षणों वाली बीमारी के लिए वह इस टेबलेट का 15 साल से इस्तेमाल कर रहे हैं। इस दवा के चमत्कारिक नतीजे रहे हैं।
वहीं भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आइसीएमआर) ने महाराष्ट्र के पुणे स्थित राजकीय चिकित्सालय ससून जनरल हॉस्पिटल को प्लाज्मा थेरेपी के जरिये कोरोना संक्रमितों के इलाज की इजाजत दे दी है। इसे तकनीकी रूप से कनवलसेंट प्लाज्मा थेरेपी कहा जाता है। इसमें कोरोना संक्र�

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