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कुष्ठ रोग का इलाज करने वाली MW वैक्सीन का कोरोना वायरस पर होगा ट्रायल

भारत में सभी रिसर्च संस्थान कोरोना वायरस की वैक्सीन ढूंढने में लगे हैं. CSIR यानी काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च, कोरोना वायरस के खिलाफ कुष्‍ठ रोग के इलाज में कारगर MW वैक्सीन का ट्रायल शुरू कर रहा है. इसके लिए CSIR ने ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इं‍डिया (DCGI) का अप्रूवल ले लिया है. जल्द ही इसका टेस्ट शुरू कर दिया जाएगा.

वहीं वायरस की प्रजाति को लेकर CSIR ने बताया है कि भारत में कोरोना वायरस की कई प्रजाति मौजूद हैं. हमारे यहां अलग-अलग देशों से लोग आए हैं. हमारे यहां वुहान वाले वायरस भी आए हैं. ईरान से जो वायरस आया वो भी वुहान जैसा ही है. इटली वालों में यूरोप और यूएस के वायरस दिखे हैं.

इस तरह हमारे देश में अलग-अलग किस्म के वायरस हैं. इसलिए देखना होगा कि किस किस्म वाले वायरस पर कौन सी दवाई असर कर रही है. हमने इम्युनिटी बढ़ाने के लिए वैक्सीन बनाने की तैयारी शुरू कर दी है. अगले कुछ हफ्तों में इसके नतीजे मिलने शुरू हो जाएंगे.

इससे पहले अमेरिकी वैज्ञानिकों ने दावा किया था कि बीसीजी का टीका कोरोना वायरस के खिलाफ परिवर्तनकारी साबित हो सकता है. न्यूयॉर्क इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एनवाईआईटी) के एक अध्ययन में इटली और अमेरिका का उदाहरण देते हुए राष्ट्रीय नीतियों के तहत कई देशों में लगाए जाने वाले बीसीजी के टीके और कोविड-19 के प्रभाव की बात कही गई है.

एक अनुसंधानकर्ता ने कहा, ‘‘हमने पाया कि जिन देशों में बीसीजी टीकाकरण की नीतियां नहीं हैं, वहां कोरोना वायरस से लोग बुरी तरह प्रभावित हुए हैं जैसे कि इटली, नीदरलैंड और अमेरिका. वहीं, उन देशों में लोगों पर कोरोना वायरस का ज्यादा असर नहीं पड़ा है जहां लंबे समय से बीसीजी टीकाकरण की नीतियां चली आ रही हैं.’’

अध्ययन के अनुसार संक्रमण और मौतों की कम संख्या बीसीजी टीकाकरण को कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में एक ‘‘गेम-चेंजर’’ बना सकती है.

हालांकि भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने कोरोना वायरस के मरीजों के इलाज में बीसीजी के वैक्सीनेशन को प्रभावशाली नहीं माना है. ICMR प्रमुख डॉ. आर गंगाखेड़कर ने एक सवाल के जवाब में कहा कि काउंसिल इस दवाई के प्रयोग की सलाह तब तक नहीं देगा, जब तक कि स्पष्ट परिणाम सामने ना आ जाएं.

उन्होंने कहा, ‘अगले हफ्ते से ICMR एक स्टडी शुरू करने जा रहा है. चूंकि अभी हमारे पास कोरोना के खिलाफ बीसीजी के टीके के स्पष्ट परिणाम नहीं हैं, इसलिए हम इसे हेल्थ वर्कर्स पर भी नहीं इस्तेमाल करेंगे.’

दरअसल इससे पहले हेल्थ केयर वर्कर को भी वैक्सीन देने की बात कही जा रही थी. क्योंकि कोरोना के खिलाफ लड़ाई में ये पहली पंक्ति में खड़े हैं.

उन्होंने आगे कहा, ‘बीसीजी का टीका जन्म के तुरंत बाद देना पड़ता है. लेकिन टीका लेने के बाद किसी को टीबी जैसी बीमारी नहीं होगी, ये दावे के साथ नहीं कहा जा सकता है. यह शायद दिमागी बुखार (मैनेनजाइटिस) के खिलाफ काम आ सकता है. इसलिए इससे आंशिक बचाव ही संभव है. बीसीजी टीका लेने के बाद भी इसका असर 15 साल तक ही होता है. अगर फिर से टीका देने की बात है तो नौजवानों में तो दिया जा सकता है लेकिन 70 साल के किसी व्यक्ति को इससे फायदा नहीं होगा.’

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