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सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाल कहा- लॉकडाउन के उल्लंघन पर IPC के सेक्शन 188 के तहत दर्ज नहीं हो केस.

सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर कहा गया है कि लॉकडाउन का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ आईपीसी की धारा 188 के तहत कार्रवाई न की जाए। लोग पहले से कोरोना के कारण त्रासदी झेल रहे हैं और उसके बाद उनके खिलाफ केस दर्ज किया जाना अन्याय है। जो लोग लॉकडाउन का उल्लंघन कर रहे हैं उनके खिलाफ कानूनी दायरे में कार्रवाई हो सकती है, पुलिस के पास विकल्प मौजूद हैं।
रद्द हों धारा 188 के तहत दर्ज सारे केस
कोरोना महामारी के समय हुए लॉकडाउन के दौरान मामूली अपराध और सरकारी आदेश के उल्लंघन के मामले में दर्ज आईपीसी की धारा 188 के तहत दर्ज केसों को रद्द करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई गई है। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अर्जी में कहा गया है कि लॉकडाउन के दौरान लोगों पर आईपीसी की धारा188 के तहत केस दर्ज किया जा रहा है। ये मामला सरकारी आदेश के उल्लंघन का बनता है। अर्जी में गुहार लगाई गई है कि इस तरह के तमाम केस रद्द किए जाएं।
यूपी के पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह की ओर से दाखिल अर्जी में कहा गया है कि आईपीसी की धारा 188 यानी सरकारी आदेश के उल्लंघन के मामले में अधिकतम एक महीने की कौद या फिर 200 रुपये जुर्माना है या फिर दोनों है। अगर सरकारी आदेश के उल्लंघन के कारण अगर किसी की जान खतरे में पड़ती है तो छह महीने तक जेल की सजा हो सकती है या फिर एक हजार रुपये तक जुर्माना हो सकता है या फिर दोनों हो सकता है।
धारा 188 के तहत केस दर्ज नहीं करने की मांग
याचिकाकर्ता सेंटर फॉर अकाउंटेबिलिटी ऐंड सिस्टेमिटक चेंज (सीएएससी) नामक एनजीओ के चेयरमैन भी हैं। याचिकाकर्ता के वकील विराग गुप्ता ने बताया कि अर्जी में सुप्रीम कोर्ट से केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश दिए जाने की मांग की गई है कि वो लॉकडाउन की स्थिति में आईपीसी के सेक्शन 188 के तहत केस दर्ज न करें।

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