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भारत ने कोरोना वायरस केस दोगुने होने की रफ्तार को कैसे किया कम?

 

कोरोना वायरस संकट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को एक बार फिर राष्ट्र को संबोधित किया. इस संबोधन में प्रधानमंत्री ने लॉकडाउन को 3 मई तक बढ़ाने का ऐलान किया.

इससे पहले देशभर में 25 मार्च को लॉकडाउन का ऐलान किया गया था. उस वक्त इसकी अवधि 14 अप्रैल तक तय की गई थी. क्योंकि कोरोना वायरस का खतरा अब भी जारी है, इसलिए मोदी सरकार ने लॉकडाउन की अवधि और बढ़ाने का फैसला किया.


कैसा रहा लॉकडाउन 1.0?

इंडिया टुडे डेटा इंटेलिजेंस यूनिट (DIU) ने कोरोना वायरस के पॉजिटिव मामलों के हर दिन के आंकड़ों को जोड़कर देखा तो पाया कि 21 दिन के पहले लॉकडाउन के आखिरी हफ्ते से कोरोना वायरस केस के बढ़ने की रफ्तार में कमी आई है.

देशभर में 25 मार्च को लॉकडाउन लागू किया गया था. उससे पहले के हफ्ते (18-24 मार्च) को देखा जाए तो कोरोना वायरस केस हर 3.3 दिन (4 दिन से कम) में दोगुने हो रहे थे.

लॉकडाउन के पहले हफ्ते (25-31 मार्च) में कोरोना वायरस केस के बढ़ने की रफ्तार में कुछ कमी आई. इस हफ्ते में केस हर 5 दिन में दोगुने हुए. लेकिन अप्रैल के पहले हफ्ते (लॉकडाउन का दूसरा हफ्ते) में तबलीगी जमात देश में कोरोना वायरस संक्रमण को फैलाने वाला बड़ा कारण बना. इस हफ्ते में कोरोना वायरस केस बढ़ने की रफ्तार में तेजी आई लेकिन ये रफ्तार तब भी लॉकडाउन लागू होने से पहले के हफ्ते की तुलना में कम रही.

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