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ऐसे लोगों की हौसला अफजाई के लिए पीएम ने उनके सम्मान में शाम 5 बजे घर के दरवाजे-खिड़कियों पर खड़े होकर ताली बजाने, थाली बजाने या घंटी बजाने का आग्रह किया. पीएम ने कहा कि लोग ऐसा करके इन लोगों को धन्यवाद कह सकते हैं. क्या होता है असली कर्फ्यू?

ऐसे लोगों की हौसला अफजाई के लिए पीएम ने उनके सम्मान में शाम 5 बजे घर के दरवाजे-खिड़कियों पर खड़े होकर ताली बजाने, थाली बजाने या घंटी बजाने का आग्रह किया. पीएम ने कहा कि लोग ऐसा करके इन लोगों को धन्यवाद कह सकते हैं.
क्या होता है असली कर्फ्यू?

अब आपको समझाते हैं कि असली कर्फ्यू और जनता कर्फ्यू में क्या अंतर होता है? कर्फ्यू में किसी भी व्यक्ति को बाहर निकलने की इजाजत नहीं होती है. इस दौरान पहले धारा 144 लगाई जाती है और बाद में इसे कर्फ्यू में तब्दील कर दिया जाता है. कर्फ्यू वाले हालात तब बनते हैं जब कानून व्यवस्था पर गंभीर संकट हो. ऐसे हालात दंगों के वक्त, शहर या कस्बे के हालात काफी ज्यादा बिगड़ जाने पर या फिर इमरजेंसी के वक्त होते हैं. इस दौरान किसी भी पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया जाता है. इसके आदेश मिजिस्ट्रेट की तरफ से जारी किए जाते हैं. हालांकि कर्फ्यू जैसे हालात में भी छात्रों की परीक्षा, शवयात्रा, शादी जैसी जरूरी चीजों पर ढील दी जाती है.

लेकिन जनता कर्फ्यू में ऐसी कोई भी पाबंदी नहीं होती है. इसमें सिर्फ जनता की ये जिम्मेदारी है कि वो खुद को और अपने पूरे परिवार को घर से बाहर जाने से रोकें. इसीलिए इसका पालन करना काफी आसान है और कोरोनावायरस जैसी गंभीर बीमारी से बचने के लिए सरकार की तरफ से उठाया गया एक कदम है

 

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