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बेटी को शादी के तोहफे में पुस्तके देनेवाले पिता को मिला ‘वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ इंडिया’

बेटी को शादी के तोहफे में पुस्तके देनेवाले पिता को मिला ‘वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ इंडिया’

राजकोट : शहर के नानामौवा क्षेत्र निवासी शिक्षक हरदेवसिंह जडेजा ने बेटी की शादी पर उसे बैलगाड़ी भर के पुस्तक तोहफे में दिए थे। उनके इस कार्य की देशभर में सराहना की गई थी। समाज को नई दिशा बतानेवाले इस शिक्षक को ‘वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ इंडिया’ से सन्मानित किया गया है। कंपनी के प्रवीण सोलंकी के हाथों पिता-पुत्री को इसका सर्टिफिकेट दिया गया।

बकौल प्रवीण सोलंकी हरदेवसिंह ने शादी के मौके पर बेटी को अनूठा उपहार दिया। इसकी जानकारी मिलने के बाद हमारी टीम द्वारा किन्नरीबा को दिए गए सभी पुस्तको का वेरिफिकेशन किया गया था। जिसके बाद कंपनी ने इस पिता-पुत्री का वर्ल्ड रिकॉर्ड दर्ज करने का निर्णय लिया। सभी चीजों का क्रॉस वेरिफिकेशन करने के बाद उनको यह महत्वपूर्ण रिकॉर्ड सर्टिफिकेट प्रदान किया गया है।

में चाहता हूं कि, मेरा यह रिकॉर्ड बारबार टूटे : हरदेवसिंह

एवॉर्ड पानेवाले हरदेवसिंह ने कहा कि, हमारा रिकॉर्ड बना यह अच्छी बात है। लेकिन में चाहता हूं कि, यह रिकॉर्ड बारबार टूटे। क्योंकि पुस्तकें ही ऐसी चीज है, जिसमें जीवन के प्रत्येक प्रश्न का जवाब निश्चित रुपसे मिलता है। ऐसे में तमाम समुदाय इस बात को अपने जीवन में उतारे। और अपनी बेटियों को ज्यादा से ज्यादा पुस्तके देकर उसके जीवन की उलजनो को सुलझाने का प्रयास करे यह बेहद जरूरी है।

बेटी की इच्छा पूरी करने के लिए पिताने 500 किलो से ज्यादा वजन के पुस्तक दिए थे

बतादे कि, हरदेवसिंह जाडेजा नामक शिक्षक की बेटी किन्नरीबा की शादी वडोदरा के इंजीनियर पूर्वजीतसिंह से हुई। पूर्वजीतसिंह अभी कनाडा में रहते हैं। किन्नरी बा को बचपन से ही किताबें पढ़ने का शौक था। इसी कारण अपनी शादी में खुद के वजन के बराबर पुस्तक देने की ख्वाहिश किन्नरी बा ने अपने पिता के सामने व्यक्त की थी। और बेटी की इच्छा को पूरी करने के लिए हरदेवसिंह ने उसके वजन से 10 गुना यानी 500 किलो से ज्यादा वजन के पुस्तक उसको दिए।

छह महीने विविध शहरों में घूमकर पिताने इकठ्ठा किए थे पुस्तक

बेटी को यह अनूठा उपहार देने के लिए हरदेवसिंह ने पहले उसकी पसंदीदा पुस्तको की सूची बनाई। फिर 6 महीने तक दिल्ली, बेंगलुरु और काशी जैसे शहरों में घूमकर इन पुस्तको को इकठ्ठा किया। जिसमें महर्षि वेद व्यास से लेकर कई नामी लेखकों द्वारा लिखी गई विविध भाषा की पुस्तकें शामिल है। इन पुस्तकों को बैलगाड़ी में भरकर किन्नरीबा को विदा किया गया था। जिसे देखकर वहां मौजूद सभी ने हरदेवसिंह और बेटी की जमकर सराहना की थी।

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