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छात्राओं के कपड़े उतरवानेवाली प्रिंसिपल समेत 4 पर मामला दर्ज, महिला आयोग ने घटना की पुष्टि की

छात्राओं के कपड़े उतरवानेवाली प्रिंसिपल समेत 4 पर मामला दर्ज, महिला आयोग ने घटना की पुष्टि की

कच्छ : भुज के श्री सहजानंद गर्ल्स इंस्टिट्यूट में 60 से ज्यादा छात्राओं के पीरियड्स की जांच के लिए कपड़े उतरवाए गए थे। मामला मीडिया में आते ही राज्य के महिला आयोग की टीम मौके पर पहुंची। और छात्राओं की पूछताछ के बाद इस घिलौने कृत्य की पुष्टि की है। जिसके चलते प्रिंसिपल समेत 4 महिला कर्मचारियों पर मामला दर्ज किया गया है।

भुज पुलिस से रिपोर्ट मांगी गई है : महिला आयोग

हालांकि मामला मीडिया में आते ही गुजरात राज्य महिला आयोग की टीम पहुंच गई। और छात्राओं से बातचीत के बाद इस घटना की पुष्टि करते हुए अध्यक्ष लीलाबेन अंकोंलिया ने बताया कि, इस कथित मामले को संज्ञान में लिया गया है। और भुज पुलिस से इस पर रिपोर्ट मांगी गई है। इस मामले में किसी भी दोषी को छोड़ा नहीं जाएगा। और आयोग की तरफ से हम जिम्मेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का प्रयास करेंगे।

वार्डन समेत चार लोगों के खिलाफ केस दर्ज : पुलिस अधीक्षक

कच्छ पश्चिम के पुलिस अधीक्षक सौरभ तोलंबीया के मिताबिक, ‘एक महिला निरीक्षक के नेतृत्व में पुलिस टीम छात्राओं से बात करने के लिए भेजी थी। ताकि प्राथमिकी दर्ज की जा सके। हालांकि पहले तो छात्राए आगे आने के लिए तैयार नहीं हुई। लेकिन बादमें कुछ लड़कियों द्वारा हिंमत करके सामने आने के बाद इस कॉलेज के प्रिंसिपल और वार्डन समेत चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

छात्राओं से बदसलूकी करनेवाले किसीको छोड़ा नहीं जाएगा : सीएम रुपाणी

मामले को लेकर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यप्रधान विजय रुपाणी ने कहा कि, सरकार इस कृत्य को लेकर गंभीर है। और तटस्थ रुपसे जांच करने के आदेश दिए गए है। राज्य महिला आयोग की टीम और पुलिस भी इस मामले की जांच कर रही है। और ऐसा कृत्य करने वाले किसीको भी छोड़ा नहीं जाएगा। सभी के सामने कड़ी कार्रवाई करने के संकेत भी उन्होंने दिए है।

जानिए क्या था मामला और कॉलेज प्रशासन ने क्या दिया था जवाब

सहजानंद इंस्टिट्यूट की छात्राओं का का आरोप था कि, प्रिंसिपल के अलावा कॉलेज के स्टाफ ने मिलकर करीब दर्जनों छात्राओं के साथ अपमानजनक व्यवहार किया। जब लड़कियों ने विरोध किया तो हॉस्टल की वॉर्डन ने उनसे कहा कि वह चाहे तो उनके खिलाफ कोर्ट जा सकती है। लेकिन शर्त ये है कि, उन्हें स्कूल हॉस्टल छोड़ना होगा। और डिक्लरेशन फॉर्म पर साइन करना होगा जिसमें लिखा है कि, उनके साथ कुछ गलत नहीं हुआ। कुछ कॉलेज स्टाफ ने छात्राओं के परिजनों को पुलिस में न जाने के लिए धमकी भी दी थी।

छात्रालय की कुलपति दर्शना ढोलकिया ने शुक्रवार को मीडिया को बताया कि, छात्रावास का एक नियम है कि पीरियड्स वाली लड़कियां अन्य लड़कियों के साथ खाना नहीं खाती। हालांकि, कुछ लड़कियों द्वारा नियम को तोड़ा गया था। जब यह मामला प्रशासन के पास पहुंचा तो कुछ लड़कियों ने खुद महिला कर्मचारी को पीरियड्स जांच की अनुमति दी। उन्हें कोई धमकी नहीं दी गई है। और यह उनकी खुद की गलती है। हालांकि बादमें कॉलेज प्रशासन द्वारा तीन लोगों को सस्पेंड किया गया था।

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