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नवजात के मौत को लेकर विवाद के बीच राजकोट में एक ही रात में और चार बच्चों ने तोड़ा दम

नवजात के मौत को लेकर विवाद के बीच राजकोट में एक ही रात में और चार बच्चों ने तोड़ा दम

राजकोट : शहर के सरकारी अस्पताल में दिसम्बर में 111 और 5 जनवरी तक 13 बच्चों की मौत हुई थी। इसको लेकर कल ही कोंग्रेस द्वारा धरना किया गया। और मुख्यप्रधाने जरुरी कदम उठाने का आश्वासन भी दिया गया। लेकिन अस्पताल के तंत्र द्वारा कोई कदम नहीं उठाए जाने पर कल रात को और चार बच्चों की मौत हो चुकी है। अन्य दो बच्चों की स्थिति भी गंभीर बताई जा रही है। जिसके चलते होनेवाले विवाद को रोकने के लिए अस्पताल प्रशासनने पुलिस बंदोबस्त तैनात कर दिया है।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, सरकारी अस्पताल में प्रति 54 बच्चे 45 को वॉर्मर में रखा जाता है। लेकिन यहां प्रति दो बच्चे एक नर्स के बजाय प्रति 10 बच्चे एक नर्स है। तो एक ही मेडिकल ऑफिसर है। बाकी सारी जिम्मेदारी 6 रेसिडेंट डॉकटरो को दी गई है। जो मेडिकल कॉलेज में अभ्यास करते है। एक सिनियर रेसिडेंट डोक्टर और एचओडी को वहीवटी काम से फुरसत नहीं मिलती। ऐसे में स्टाफ की कमी के कारण बच्चों की मौत का आंकड़ा बढ़ रहा है।

जानकर डॉकटरो के मुताबिक, डेढ़ किलो से कम वजन के बच्चों के उपचार का खास प्रोटोकॉल होता है। जिसमें बच्चे को एनआईसीयू में रखकर उपचार किया जाता है। वहां इंफेक्शन कंट्रोल, हाइपोथर्मिया प्रिवेंशन के साथ न्यूट्रिशन केर जैसी माता के गर्भ में मिलनेवाली सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती है। लेकिन इसके लिए प्रति दो बच्चे एक नर्स होना आवश्यक है। क्योंकि यहां बार-बार बच्चों के पल्स और श्वास की जांच करनी पड़ती है।

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