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राजस्थान को छोड़ो गुजरात के दो शहरों के सरकारी अस्पताल में एक महीने में 219 बच्चों की मौत

राजस्थान को छोड़ो गुजरात के दो शहरों के सरकारी अस्पताल में एक महीने में 219 बच्चों की मौत

राजकोट : राजस्थान के कोटा सरकारी अस्पताल में ही 107 बच्चों की मौत को लेकर देशमें हंगामा खड़ा हो गया है। ऐसे में अब गुजरात के सिर्फ दो शहरों के सरकारी अस्पताल में एक महीने में 219 बच्चों की मौत की खबर सामने आई है। जानकारी के मुताबिक, अहमदाबाद सिविल अस्पताल में पिछले महीने यानी दिसंबर में 85 बच्चों की मौत हो गई, जबकि राजकोट में एक महीने में 134 बच्चों ने दम तोड़ दिया। जिसको लेकर राजनीति की जा रही है।

गुजरात कोंग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने ट्विट कर सीएम रुपाणी पर सवाल उठाए है। और कहा कि, गुजरात के सीएम विजय रुपाणी खुद ही राजकोट से विधायक है। और राजकोट के अस्पताल में जनवरी से दिसंबर में 1,235 मासूमो की मौत हुई है। तो अमित शाह गाँधीनगर+अहमदाबाद से सांसद हैं। जहां के सरकारी अस्पताल में सिर्फ 3 महीने में 375 मासूमो की मौत हो गई है। और इस बारेमें सवाल पूछने पर CM भाग खड़े होते है। क्या PM ऐसे मुख्यप्रधान को बर्खास्त करेंगे?

बतादे कि, अहमदाबाद में दिसंबर 2019 में 85 बच्चों की मौत हुई। वहीं नवंबर में 74, के साथ अक्टूबर में 94 बच्चों ने दम तोड़ा है। इतना ही नहीं राजकोट के चिल्ड्रन हॉस्पिटल में एक साल में 1235 बच्चों की मौत हो चुकी है। और बच्चों के माता-पिता इसके लिए अस्पताल प्रसाशन की बड़ी लापरवाही को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। हालांकि अस्पताल तंत्र का कहना है कि, प्राइवेट अस्पताल आखिरी समय पेशंट को सरकारी अस्पताल में रिफर करते है। जिसके चलते अस्पताल में मौत का आंकड़ा बढ़ जाता है।

राजकोट सरकारी अस्पताल के सिविल सर्जन डोक्टर मनीष महेता का कहना है कि, अक्टूबर में 87 नवंबर में 71 और दिसंबर में 111 बच्चो की मौत हुई है। और प्रतिमाह मौत का आंकड़ा इसके आसपास ही रहता है। अन्य प्राइवेट अस्पताल काफी देर से रिफर करते है। तो कई बच्चो का वजन कम हो उसे बचना मुश्किल होता है। यहां डॉक्टरों की कमी होने की बात को गलत बताते हुए उन्होंने इसके लिए कुदरत को भी जिम्मेदार ठहराया।

इधर अहमदाबाद सिविल अस्पताल के सुप्रीटेंडेंट डॉक्टर गुणवंत राठौर के मुताबिक, ‘हर महीने 400 से ज्यादा बच्चे अस्पताल में दाखिल किए जाते हैं। उस हिसाब से मृत्युदर सिर्फ 20 प्रतिशत है। सुविधाओं की कोई कमी नहीं। निजी अस्पतालों से बच्चा क्रिटिकल कंडीशन में सरकारी अस्पताल भेजा जाता है। ऐसे में बच्चों की मौत पर आंकड़ा केवल सरकारी अस्पतालों में देखने को मिलता है। प्रति माह तकरीबन 400 बच्चे अस्पताल में दाखिल होते है। जिसमें से 80 फीसदी बच्चे स्वस्थ होकर जाते हैं’.

हालांकि, राज्य सरकार ने खुद विधानसभा में स्वीकार किया था कि, वर्ष 2019 तक गुजरात में कुपोषण से 1,41,142 बच्चे पीड़ित है। आदिवासी इलाकों में कुपोषण की हालत और भी खराब है। दाहोद और नर्मदा कुपोषण से सबसे ज़्यादा प्रभावित जिले है। दाहोद में कुपोषित बच्चों की संख्या 14,191 हुई है। जबकि नर्मदा जिले में 12,673 बच्चे कुपोषित है। तो कुपोषण के कारण बच्चो की मौत का आंकड़ा बढ़ने की बात को भी नकारा नहीं जा सकता है।

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