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डेपसांग प्लेन्स में तनाव कम करने के लिए भारत-चीन के सैन्य कमांडर्स के बीच बैठक, डि-एस्केलेशन पर पहली बार हो रही है चर्चा

पैंगोंग-त्सो लेक से सटे फिंगर एरिया में भारत और चीन के बीच डिसइंगेजेंट को लेकर भले ही अभी तक कोई सहमति ना बनी हो, लेकिन अब दोनों देशों के सैन्य कमांडर डेपसांग-प्लेन्स में हेवी बिल्ट-अप यानी दोनों देशों की सेनाओं के जमावड़े को कम करने को लेकर मीटिंग के लिए तैयार हो गए हैं. यानी पिछले तीन महीने से चल रहे डि-एस्केलेशन को लेकर दोनो देशों के बीच ये पहली बैठक है, जो पूर्वी लद्दाख के डीबीओ सेक्टर में शनिवार को चल रही है.

सूत्रों के मुताबिक, शनिवार की बैठक दौलत बेग ओल्डी (डीबीओ) में चीनी सेना की बीपीएम (बॉर्डर पर्सनैल हट) में सुबह 11 बजे शुरू हुई. भारत की तरफ से लद्दाख के कारू स्थित 3-डिव (त्रिशुल डिवीजन) के जीओसी, मेजर जनरल अभिजीत बापट इस मीटिंग में हिस्सा ले रहे हैं. चीन के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व, पीएलए सेना के एक मेजर-जनरल रैंक के अधिकारी कर रहे हैं.

जानकारी के मुताबिक, शनिवार की ये मीटिंग डेपसांग-प्लेन्स में दोनों देशों के इस इलाके में हेवी बिल्ड-अप यानी बड़ी तादाद में सैनिक, टैंक, हेवी-मशीनरी और तोपों की तैनाती को लेकर है. आपको बता दें कि जबसे भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में टकराव शुरू हुआ है, तब से चीनी सेना ने काराकोरम पास (दर्रे) से सटे इस इलाके में बड़ी तादाद में अपनी तैनाती मजबूत की है. भारत ने भी मिरर-डिपलोयमेंट करते हुए यहां पहली बार टी-90 ‘भीष्म’ टैंकों की तैनाती की थी. करीब 16 हजार फीट की ऊंचाई पर ये स्थान दुनिया के सबसे उंचाई वाले कोल्ड-डेजर्ट यानी ठंडे-रेगिस्तान में से एक है.

कारोकराम पास और डीबीओ से सटा डेपसांग प्लेन्स का इलाका एक बड़ा मैदानी-क्षेत्र है. यहीं पर अप्रैल 2013 में भारत और चीनी सेना के बीच 25 दिन लंबा फेसऑफ हुआ था. उस वक्त चीनी सेना ने यहां पर अपने टेंट गाड़ लिए थे. इस बार चीनी सेना ने हेवी बिल्ट अप किया है. कहा तो ये भी जा रहा है कि चीनी सेना भारतीय सैनिकों के यहां पर पैट्रोलिंग करने पर एतराज जता रही है, लेकिन भारतीय सेना की तरफ से इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. इस इलाके में भारत के पांच मुख्य पैट्रोलिंग-पॉइन्ट (पीपी) हैं — 10, 11, 11-ए, 12 और 13.

पूर्वी लद्दाख से सटी लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल यानी एलएसी पर चल रही तनातनी के बीच ही शुक्रवार को सह-वायुसेना प्रमुख (वाइस चीफ), एयर मार्शल एच एस अरोड़ा ने डीबीओ स्थित भारतीय वायुसेना की लैंडिंग-स्ट्रीप का दौरा किया था. ये दुनिया की सबसे उंचाई वाली एएलजी यानी एडवांस लैंडिंग-ग्राउंड है, जहां मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट को उतारा जा सकता है. इसी कड़ी में शुक्रवार को एयर मार्शल अरोड़ ने एचएल द्वारा तैयार किया गया स्वदेशी अटैक हेलीकॉप्टर, एलसीएच (लाइट कॉम्बेट हेलीकॉप्टर) का ट्रायल लिया. माना जा रहा है कि जल्द ही एलसीएच हेलीकॉप्टर वायुसेना में शामिल हो सकता है.

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