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PM मोदी ने फिर चौंकाया, चीन से तनाव के बीच जवानों से मिलने पहुंच गए लेह

15 जून को गलवान घाटी में खूनी झड़प के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज अचानक लेह पहुंच गए हैं. पीएम नरेंद्र मोदी जवानों और फिल्ड कमांडर के साथ बातचीत कर रहे हैं. इसके बाद पीएम मोदी कुछ लोकेशन पर जा सकते हैं और जमीनी हकीकत का जायजा ले सकते हैं. इसके साथ ही पीएम मोदी घायल जवानों से मुलाकात भी कर सकते हैं.

 

गौरतलब है कि भारत और चीन सीमा पर तनाव बरकरार है. चीन के बदले रुख के बाद भारतीय सेना ने करीब 45 हजार से अधिक जवानों को पूर्वी लद्दाख सीमा पर तैनात किया है. चीन की ओर से भी तैनाती बढ़ाई जा रही है. लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लेह दौरा कई बड़े संदेश देता है.

15 जून को गलवान में हुई थी झड़प

भारत और चीन की सेनाओं के बीच 15 जून की रात खूनी झड़प हुई थी. गलवान घाटी में पेट्रोलिंग प्वाइंट-14 के पास हुई इस झड़प में भारतीय सेना के 20 जवान शहीद हो गए थे. इसमें कमांडिंग अफसर संतोष बाबू भी शामिल थे. इस खूनी झड़प में कई चीनी सैनिक भी हताहत हुए थे, लेकिन चीन की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं जारी किया गया था.

क्यों हुई थी गलवान में झड़प

केंद्रीय मंत्री और पूर्व आर्मी चीफ जनरल वीके सिंह के मुताबिक, गलवान घाटी में पेट्रोलिंग प्वाइंट-14 के पास चीनी सैनिकों ने तंबू लगाए थे. भारतीय सेना ने चीन को पीछे हटने के लिए कहा था. चीनी सैनिकों ने वादा किया था कि वह पीछे चले जाएंगे, लेकिन वह नहीं गए. इसके बाद भारतीय सेना की एक टुकड़ी पीपी-14 पर चीनी सैनिकों से बात करने गई थी.

केंद्रीय मंत्री वीके सिंह के मुताबिक, जब भारतीय सैनिक पीपी-14 के पास पहुंचे थे तो वहां पर बड़ी संख्या में चीनी सैनिक इकट्ठा थे. बातचीत के दौरान ही अचानक चीनी सैनिकों के तंबू में आग लग गई. इसके बाद दोनों देशों के सेनाएं आमने-सामने आ गई. यह खूनी झड़प पूरी रात चलती रही.

दोनों देशों के बीच हो चुकी है तीन दौर की बातचीत

गलवान घाटी में झड़प के बाद दोनों सेनाओं के अधिकारियों के बीच दो दौर की बातचीत हुई है. इससे पहले 6 जून को बातचीत हुई थी, जिसमें चीनी सैनिक पीछे हटने के लिए तैयार हो गई थी, लेकिन वह पीछे नहीं गए. नतीजन दोनों देशों के सैनिकों के बीच खूनी झड़प हुई.

गलवान झड़प के बाद दोनों देशों के बीच दो दौर की सैन्य कमांडर स्तर पर बातचीत हुई. हर बातचीत में चीन पीछे हटने के लिए तैयार हो जाता है, लेकिन जमीन पर अपनी तैनाती को बढ़ाते जा रहा है. भारतीय सेना की ओर से भी मिरर तैनाती की जा रही है.

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